बिहारशरीफ में 28 जनवरी से फ्लाईओवर चालू होने की संभावनाः 6 बार उद्घाटन की डेट फेल,
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यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि $60 बिलियन का एक ऐसा जाल है जो भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। जानिए पूरा मामला आसान भाषा में 👇
📌 ताजा विवाद क्या है?
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय (माओ निंग) ने दावा किया है कि शक्सगाम घाटी चीन का हिस्सा है और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना उनका अधिकार है। यह बयान तब आया है जब भारत ने इस इलाके में चीन के अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी।
📌 इतिहास: यह जमीन चीन के पास कैसे गई?
यह इलाका भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन:
1️⃣ 1948 में पाकिस्तान ने इस पर अवैध कब्जा किया।
2️⃣ 1963 में पाकिस्तान ने 'दोस्ती' के नाम पर यह भारतीय जमीन चीन को गिफ्ट कर दी (सीमा समझौता)।
आज चीन इसी 1963 के समझौते की दलील देकर अपने कब्जे को सही ठहरा रहा है।
📌 CPEC: चीन का असली 'Game Plan'
चीन यहां से China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) गुजार रहा है।
💰 लागत: $60 बिलियन (करीब 5 लाख करोड़ रु.)
🛣 रूट: चीन के शिनजियांग से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक।
🚧 विवाद: यह कॉरिडोर भारत के गिलगित-बाल्टिस्तान (PoK) से गुजरता है, जो भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।
📌 चीन को इससे क्या फायदा? (The Strategic Angle)
चीन सिर्फ सड़क नहीं बना रहा, वह समंदर पर राज करना चाहता है:
🔹 मलक्का की खाड़ी का विकल्प: अभी चीन का 80% कच्चा तेल (Crude Oil) मलक्का से होकर 16,000 KM का सफर तय करता है। CPEC से यह दूरी 5,000 KM कम हो जाएगी।
🔹 अरब सागर में एंट्री: ग्वादर पोर्ट के जरिए चीन की नेवी सीधे अरब सागर और हिंद महासागर में अपनी पैठ बना सकेगी, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।
🇮🇳 भारत का रुख साफ है:
कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान या चीन द्वारा किया गया कोई भी बदलाव या समझौता अवैध है।
🗣 आपकी राय क्या है?
चीन CPEC के जरिए भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। क्या भारत को अब अपनी 'One China Policy' पर पुनर्विचार करना चाहिए?
कमेंट बॉक्स में अपनी राय लिखें और 'जय हिन्द' के साथ शेयर करें! 🇮🇳💪
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